जब जब हात मे
किताब आता हे
दिल नजाने
कहाँ कहाँ उडा जाता हे ।
जब में कविताए
डुँडती हु
मन ही मन मे
मुसकाने लगती हु ।
जब मे उनको
जोर से ठुकराती हु
किताबे कहते
हे मे तुमहे देखता हु
मुजे भी मन मे
रोना आता हे
लेकिन न मे
किसको दिखलाता हु
जब मे अलमारी
मे पडा रहता हु
सालो से एक
जगह सोता हु ।
लोक पढने आते
हे जब मुजको
सिर्फ तभी
खुशी के मारे उछलता हु ।
जब जब हात मे
किताब आता हे
दिल नजाने
कहाँ कहाँ उडा जाता हे ।
शाहीन
शबीर मुल्ला
तालुका
: खानपुर
जिला
: सांगली
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